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जमीन की सरकारी पैमाइश (सीमांकन) कैसे कराएं? जानिए धारा 24 के नियम, चालान शुल्क, चौहद्दी व संपूर्ण कानूनी प्रक्रिया

📅 प्रकाशित: 2 अक्टूबर 2026 • 🔄 अंतिम अपडेट: 5 अक्टूबर 2026 • ⏱️ पढ़ने का समय: 6 मिनट

गाँव या देहात में खेती की जमीन को लेकर होने वाले लगभग 70% विवाद खेत की मेड़ काटने, पड़ोसी द्वारा थोड़ा-थोड़ा करके रकबा दबाने या सार्वजनिक चकरोड पर अतिक्रमण करने से शुरू होते हैं। कई बार किसान वर्षों तक आपस में लड़ते रहते हैं, थाने के चक्कर काटते हैं, लेकिन कानूनी रास्ता नहीं अपनाते।

यदि आपकी कृषि भूमि का क्षेत्रफल खतौनी में दर्ज रकबे से कम लग रहा है, या पड़ोसी काश्तकार ने आपकी मेड़ काटकर अपनी सीमा में मिला ली है, तो इसका सबसे ठोस, कानूनी और पक्का समाधान है—सरकारी पैमाइश (सीमांकन / हदबरारी) कराना। इस लेख में हम उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 24 के तहत पैमाइश कराने के सभी नियमों और प्रक्रियाओं को सरल भाषा में समझेंगे।

खेत की सरकारी पैमाइश (हदबरारी) का कानूनी प्रार्थना पत्र तुरंत तैयार करें

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1. क्या है धारा 24 सीमांकन (Demarcation) कानून?

विधिक प्रावधान: उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद (Board of Revenue UP) के तहत उप्र राजस्व संहिता, 2006 की धारा 24 स्पष्ट प्रावधान करती है कि कोई भी भूमिधर (खातेदार) अपने गाटे की सीमा निश्चित कराने हेतु उपजिलाधिकारी (SDM / SDO) के समक्ष विहित रीति से आवेदन कर सकता है।

इस धारा का मुख्य उद्देश्य किसी भी खेत की वास्तविक सीमाओं को राजस्व नक्शे (शजरा) और बंदोबस्त रिकॉर्ड के अनुसार मौके पर नापकर पक्की सीमा रेखा (सीमा स्तम्भ) स्थापित करना है।

2. पैमाइश के लिए सरकारी चालान शुल्क कितना है?

उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता नियमावली, 2016 के नियम 22(1) के अनुसार:

3. पैमाइश में 'चौहद्दी' (चारों दिशाओं के काश्तकार) का क्या महत्व है?

जब आप एसडीएम न्यायालय में प्रपत्र आर.सी.-22 के अनुसार प्रार्थना पत्र देते हैं, तो उसमें आपके खेत के चारों दिशाओं के सीमावर्ती काश्तकारों के नाम (चौहद्दी) दर्ज करना अनिवार्य होता है:

  1. पूर्व दिशा (East): पूर्व दिशा से सटे गाटे/खेत के मालिक का नाम।
  2. पश्चिम दिशा (West): पश्चिम दिशा से सटे खेत के मालिक का नाम।
  3. उत्तर दिशा (North): उत्तर दिशा से सटे खेत या रास्ते का विवरण।
  4. दक्षिण दिशा (South): दक्षिण दिशा से सटे खेत के काश्तकार का नाम।

चौहद्दी क्यों जरूरी है? कानून के अनुसार, पैमाइश करने से पूर्व इन चारों दिशाओं के पड़ोसियों को राजस्व न्यायालय द्वारा पंजीकृत नोटिस जारी किया जाता है। इससे नाप के दिन सभी पक्ष मौके पर मौजूद रहते हैं, जिससे बाद में कोई यह बहाना नहीं बना सकता कि उसे बिना बताए नाप की गई।

4. पैमाइश कराने के लिए आवश्यक दस्तावेज (Checklist)

क्र.सं. दस्तावेज का नाम विवरण एवं उद्देश्य
1 धारा 24 के अंतर्गत प्रार्थना पत्र जिसमें आवेदक का नाम, ग्राम, गाटा, क्षेत्रफल और चारों दिशाओं की चौहद्दी स्पष्ट रूप से लिखी हो।
2 अद्यतन खतौनी (Khatauni) की प्रमाणित प्रति भूमि के स्वामित्व और वर्तमान रकबे को प्रमाणित करने हेतु (भूलेख पोर्टल की प्रमाणित प्रति)।
3 ₹1000 प्रति गाटा चालान रसीद राजस्व मद में जमा की गई सरकारी चालान की मूल प्रति।
4 गाटे का राजस्व नक्शा (शजरा / Village Map) सबंधित गाँव का प्रमाणित भू-नक्शा, जिस पर संबंधित गाटे की आकृति अंकित हो।
5 पहचान प्रमाण पत्र आवेदक का आधार कार्ड अथवा मतदाता पहचान पत्र की स्व-प्रमाणित प्रति।

5. आवेदन से लेकर खेत नपने तक की 5-चरणीय प्रक्रिया

अक्सर नागरिक इस प्रक्रिया से अनभिज्ञ होते हैं, जिसके कारण उन्हें अनावश्यक परेशानी झेलनी पड़ती है। सही प्रक्रिया निम्नलिखित है:

6. यदि पड़ोसी पैमाइश में रुकावट डाले या मेड़ न बांधने दे?

व्यावहारिक परिस्थितियों में कई बार विपक्षी काश्तकार नाप के दौरान विवाद करते हैं या जरीब खींचने नहीं देते।

ऐसे मामलों में उप्र राजस्व संहिता की धारा 24 की उपधारा (3) आवेदक को विशेष संरक्षण देती है। आप न्यायालय में प्रार्थना पत्र देकर पुलिस बल (Police Force Assistance) की मांग कर सकते हैं। एसडीएम के निर्देश पर स्थानीय थाना पुलिस की मौजूदगी में पैमाइश कराई जाती है और सरकारी कार्य में बाधा डालने वाले के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाती है।

कानूनी भाषा में पैमाइश का शुद्ध आवेदन पत्र लिखें

हमारा टूल धारा 24 और प्रपत्र आर.सी.-22 के सभी विधिक प्रारूपों के अनुकूल तैयार किया गया है:

तहसील पैमाइश आवेदन जनरेटर खोलें →

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Frequently Asked Questions)

प्र. 1: जमीन की सरकारी पैमाइश के लिए सरकारी चालान शुल्क कितना होता है?

उत्तर: ₹1,000 प्रति गाटा। उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता नियमावली, 2016 के नियम 22 के तहत प्रत्येक गाटे के लिए ₹1,000 का सरकारी चालान ट्रेजरी में जमा करना अनिवार्य है।

प्र. 2: पैमाइश का प्रार्थना पत्र किसके न्यायालय में प्रस्तुत किया जाता है?

उत्तर: उपजिलाधिकारी (SDM / SDO) न्यायालय में। धारा 24 के अंतर्गत सीमांकन का विधिक अधिकार केवल एसडीएम के पास है। कानूनगो या लेखपाल सीधे अपने स्तर पर बिना न्यायालयी आदेश के पैमाइश नहीं कर सकते।

प्र. 3: पैमाइश आवेदन में चारों दिशाओं की चौहद्दी लिखना क्यों जरूरी है?

उत्तर: क्योंकि प्रपत्र आर.सी.-22 के अनुसार आपके खेत से सटी चारों दिशाओं (पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण) के सीमावर्ती काश्तकारों को विधिक नोटिस भेजा जाता है, ताकि नाप के समय कोई गैर-हाजिर रहने का बहाना न बना सके।

प्र. 4: यदि पड़ोसी काश्तकार पैमाइश में रुकावट डाले तो क्या करें?

उत्तर: आप धारा 24(3) के तहत एसडीएम न्यायालय में पुलिस बल की सहायता हेतु अर्जी दे सकते हैं। पुलिस बल की सुरक्षा में पैमाइश संपन्न कराई जाती है और रुकावट डालने वाले पर कानूनी कार्रवाई होती है।

प्र. 5: क्या किसी बड़े गाटे का सह-खातेदार अकेले पैमाइश करा सकता है?

उत्तर: हाँ, पूरे गाटे की बाहरी सीमाओं की पैमाइश कराई जा सकती है। किंतु यदि गाटे के अंदर साझेदारों के बीच आंतरिक सीमा तय करनी हो, तो पहले धारा 116 के अंतर्गत पारिवारिक बंटवारा/कुर्रा बंदी का वाद दायर करना आवश्यक होता है।

प्र. 6: पैमाइश की प्रक्रिया पूरी होने में अधिकतम कितना समय लगता है?

उत्तर: राजस्व संहिता के नियमों के अनुसार वाद दायर होने से लेकर अंतिम आदेश पारित होने की वैधानिक समयसीमा अधिकतम 90 दिन निर्धारित की गई है।

प्र. 7: यदि कानूनगो या लेखपाल नाप में पक्षपात करे तो कहाँ शिकायत करें?

उत्तर: कानूनगो द्वारा प्रस्तुत फील्ड बुक आख्या पर आप सीधे एसडीएम न्यायालय में अपनी आपत्ति (Objection) दर्ज कर सकते हैं। एसडीएम के अंतिम फैसले से असंतुष्ट होने पर 30 दिन के भीतर राजस्व कमिश्नर (अपर आयुक्त) के समक्ष अपील की जा सकती है।

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विशाल राज (Vishal Raj)
संस्थापक, Application Helper

विशाल राज नागरिक अधिकारों, भूमि राजस्व संहिता और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के विश्लेषक हैं। उनका उद्देश्य ग्रामीण एवं शहरी नागरिकों को जटिल तहसील प्रक्रियाओं, लेखपाल-कानूनगो कार्यालयों के अनावश्यक चक्करों और दलालों से मुक्ति दिलाकर आत्मनिर्भर बनाना है। इस लेख के सभी तथ्य उप्र राजस्व संहिता 2006 एवं बोर्ड ऑफ रेवेन्यू के नियमों पर आधारित हैं।