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खेत की मेड़ काटने या सीमा विवाद पर कानूनी कार्रवाई कैसे करें? जानिए उप्र राजस्व संहिता धारा 24 व 227 नियम, पुलिस व SDM प्रार्थना पत्र

📅 प्रकाशित: 6 अक्टूबर 2026 • 🔄 अंतिम अपडेट: 6 अक्टूबर 2026 • ⏱️ पढ़ने का समय: 6 मिनट

भारतीय ग्रामीण जनजीवन में कृषि भूमि किसानों की आजीविका और आत्मसम्मान का सबसे बड़ा आधार होती है। परंतु गाँवों में खेत की मेड़ (Boundaries) काटना, जुताई के समय मेड़ को धीरे-धीरे दूसरे के खेत की ओर खिसका देना, अथवा सिंचाई की नाली व मेड़ पर जबरन कब्जा कर लेना सबसे आम और ज्वलंत विवादों में से एक है। अक्सर ऐसे छोटे-छोटे सीमा विवाद बड़े झगड़ों, मुकदमों और खूनी रंजिशों में बदल जाते हैं।

अक्सर किसानों का अनुभव यह होता है कि जब वे विपक्षी को मेड़ काटने से मना करते हैं, तो दबंगई के बल पर उन्हें डराया-धमकाया जाता है। आवेश में आकर खुद झगड़ा करने के बजाय कानून का सहारा लेना ही सबसे सुरक्षित और स्थायी समाधान है। उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 24 और धारा 227 में खेत की आधिकारिक पैमाइश कराने, मेड़ को पुनः स्थापित कराने और मेड़ को नुकसान पहुंचाने वाले पर हर्जाना वसूलने की स्पष्ट विधिक व्यवस्था है। इस मार्गदर्शिका में हम मेड़ विवाद के समाधान की पूरी कानूनी प्रक्रिया समझेंगे।

उपजिलाधिकारी (SDM) / तहसीलदार को मेड़ पैमाइश व विवाद निवारण आवेदन तैयार करें

बिना किसी बिचौलिए के अपने खेत का गाटा नंबर, चारों दिशाओं की चौहद्दी व विवाद का विवरण दर्ज कर 1 मिनट में विधिक प्रार्थना पत्र तैयार करें:

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1. मेड़ विवाद से संबंधित प्रमुख कानूनी धाराएं

खेत की मेड़ और सीमा विवाद के निस्तारण हेतु निम्नलिखित विधिक प्रावधान लागू होते हैं:

2. तुलनात्मक तालिका: राजस्व न्यायालय बनाम पुलिस हस्तक्षेप

तुलनात्मक बिंदु राजस्व विभाग (SDM / तहसीलदार) पुलिस विभाग (थाना प्रभारी)
अधिकार क्षेत्र खेत की पैमाइश, सीमांकन, नक्शा मिलान व मेड़ निर्धारण। शांति व्यवस्था, मारपीट रोकना, सुरक्षा व पाबंदी।
लागू धाराएं उप्र राजस्व संहिता, 2006 (धारा 24, 26, 227)। BNSS धारा 126, 135 व बीएनएस (BNS) की धाराएं।
अंतिम समाधान स्थायी पत्थर गड़वाकर मेड़ की सीमा सुनिश्चित करना। पैमाइश के दौरान राजस्व टीम को सुरक्षा उपलब्ध कराना।
आवेदन का प्रारूप विधिक प्रारूप आर.सी.-22 मय ट्रेजरी चालान। शांति भंग व जान-माल की सुरक्षा हेतु प्रार्थना पत्र।

3. धारा 227 के तहत नुकसान की भरपाई व कानूनी दंड

विधिक सुरक्षा: उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 227 स्पष्ट उपबंध करती है कि यदि कोई व्यक्ति किसी वैध सीमा चिन्ह या मेड़ को नष्ट करता है, तो राजस्व प्राधिकारी उस व्यक्ति से मेड़ की पुनर्स्थापना का सम्पूर्ण खर्च वसूल करेगा और उस पर जुर्माना (Penalty) भी अधिरोपित कर सकता है। बार-बार मेड़ काटने पर दीवानी न्यायालय से स्थायी निषेधाज्ञा (Permanent Injunction / Stay Order) भी प्राप्त की जा सकती है।

4. आवेदन पत्र के साथ आवश्यक दस्तावेजों की चेकलिस्ट

एसडीएम न्यायालय अथवा तहसील दिवस में आवेदन करते समय निम्नलिखित दस्तावेज साथ रखें:

  1. वर्तमान प्रमाणित खतौनी की प्रति: जिसमें आवेदक और विपक्षी दोनों के गाटा नंबर व खातेदारों के नाम दर्ज हों।
  2. गाँव के सजरा (नक्शा) की छायाप्रति: जिसमें अपने खेत और पड़ोसी के खेत की सीमाएं स्पष्ट दिख रही हों।
  3. चारों दिशाओं की चौहद्दी (Four Boundaries): पूरब, पश्चिम, उत्तर व दक्षिण में स्थित पड़ोसी काश्तकारों के नाम व गाटा नंबर।
  4. ट्रेजरी चालान की मूल प्रति (Form 24): ₹1,000 प्रति गाटा के हिसाब से सरकारी खजाने में जमा शुल्क की रसीद।
  5. शांति व्यवस्था हेतु पुलिस प्रार्थना पत्र: यदि विपक्षी द्वारा मौके पर गाली-गलौज या धमकी दी गई हो।

5. मेड़ विवाद निपटाने की 4-चरणीय व्यावहारिक कार्ययोजना

  1. चरण 1 (आपसी बातचीत व साक्ष्य संकलन): विवादित मेड़ की मोबाइल से स्पष्ट तस्वीरें और वीडियो बना लें ताकि यह सिद्ध हो सके कि मेड़ हाल ही में काटी गई है।
  2. चरण 2 (SDM न्यायालय में धारा 24 वाद दायर करना): हमारे पोर्टल से विधिक प्रारूप में आवेदन तैयार करें और ₹1,000 चालान रसीद के साथ एसडीएम कोर्ट में सीमांकन वाद दर्ज कराएं।
  3. चरण 3 (स्थलीय पैमाइश व नोटिस): न्यायालय विपक्षी को नोटिस जारी करेगा। नियत तारीख पर राजस्व निरीक्षक (कानूनगो) और लेखपाल सरकारी जरीब लेकर मौके पर आएंगे और सजरा नक्शे से नाप करेंगे।
  4. चरण 4 (मेड़ बांधना व सीमा स्तम्भ गड़वाना): पैमाइश आख्या स्वीकृत होने पर दोनों खेतों के बीच मूल सीमा पर स्थायी पत्थर गड़वा दिए जाएंगे और मेड़ की विधिक पुनर्स्थापना हो जाएगी।
मेड़ विवाद / पैमाइश आवेदन पत्र तुरंत तैयार करें:

हमारा जनरेटर टूल धारा 24 व आर.सी. प्रपत्र 22 के सभी विधिक प्रारूपों के अनुकूल प्रार्थना पत्र तैयार करता है:

तहसीलदार / SDM जनरेटर खोलें →

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Frequently Asked Questions)

प्र. 1: पड़ोसी किसान द्वारा खेत की मेड़ काटने पर सबसे पहले क्या करना चाहिए?

उत्तर: आवेश में आकर झगड़ा करने के बजाय मौके की तस्वीरें लें और उपजिलाधिकारी (SDM) न्यायालय में उप्र राजस्व संहिता की धारा 24 के तहत सीमांकन (पैमाइश) हेतु आवेदन दाखिल करें।

प्र. 2: क्या मेड़ विवाद में पुलिस सीधे मेड़ बांध सकती है?

उत्तर: नहीं। पुलिस को जमीन नापने या मेड़ तय करने का विधिक अधिकार नहीं है। पुलिस केवल शांति व्यवस्था बनाए रखने और राजस्व टीम को सुरक्षा देने का कार्य करती है।

प्र. 3: खेत की सरकारी पैमाइश कराने का शुल्क कितना है?

उत्तर: उत्तर प्रदेश में धारा 24 के अंतर्गत प्रति गाटा संख्या (खेत नंबर) ₹1,000 का सरकारी ट्रेजरी चालान जमा करना होता है।

प्र. 4: यदि विपक्षी पैमाइश के दौरान मारपीट या गाली-गलौज करे तो क्या करें?

उत्तर: स्थानीय थाने में लिखित तहरीर देकर शांति भंग (BNSS 126/135) में पाबंद करवाएं और एसडीएम से 'पुलिस बल की उपस्थिति में पैमाइश' कराने का आदेश प्राप्त करें।

प्र. 5: मेड़ काटने पर विपक्षी पर क्या जुर्माना लगाया जा सकता है?

उत्तर: राजस्व संहिता की धारा 227 के तहत सीमा चिन्ह नष्ट करने पर न्यायालय विपक्षी से मेड़ बनवाने का पूरा सरकारी खर्च वसूलता है और उस पर आर्थिक जुर्माना भी लगा सकता है।

प्र. 6: पैमाइश के बाद मेड़ पर पत्थर कौन स्थापित करता है?

उत्तर: एसडीएम के अंतिम आदेश के बाद राजस्व निरीक्षक (कानूनगो) और लेखपाल अपनी उपस्थिति में खेत के कोनों पर स्थायी पत्थर (सीमा स्तम्भ) गड़वाते हैं।

प्र. 7: क्या बार-बार मेड़ काटने पर स्टे (निषेधाज्ञा) लिया जा सकता है?

उत्तर: हाँ, यदि पड़ोसी बार-बार जानबूझकर कब्जा करने का प्रयास करे, तो सिविल न्यायालय में वाद दायर कर स्थायी निषेधाज्ञा (Permanent Injunction / Stay Order) प्राप्त की जा सकती है।

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विशाल राज (Vishal Raj)
संस्थापक, Application Helper

विशाल राज नागरिक अधिकारों, भू-राजस्व कानूनों और पुलिस प्रशासनिक प्रक्रियाओं के विश्लेषक हैं। उनका उद्देश्य किसानों को भूमि विवादों में विधिक अधिकारों की सही जानकारी देकर अनावश्यक हिंसा से बचाना और उन्हें कानूनी रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।