📜 राजस्व कानून एवं सार्वजनिक संपत्ति प्रभाग

सार्वजनिक चकरोड, नाली या ग्राम सभा भूमि से अवैध अतिक्रमण कैसे हटवाएं? जानिए धारा 67 व धारा 26 नियम, बेदखली प्रक्रिया व SDM आवेदन पत्र

📅 प्रकाशित: 6 अक्टूबर 2026 • 🔄 अंतिम अपडेट: 6 अक्टूबर 2026 • ⏱️ पढ़ने का समय: 6 मिनट

ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक चकरोड (कच्चा अथवा पक्का रास्ता), जल निकासी की नाली, खलिहान, चारागाह और नवीन परती जैसी ग्राम सभा की सार्वजनिक भूमियां पूरे गाँव के सामूहिक उपयोग के लिए आरक्षित होती हैं। चकरोड से होकर किसान अपने ट्रैक्टर, बैलगाड़ी, फसल और कृषि उपकरण खेतों तक ले जाते हैं।

परंतु अक्सर दबंग अथवा लालची पड़ोसियों द्वारा चकरोड की मेड़ काटकर अपने खेत में मिला लेना, उस पर कटीले तार या दीवार खड़ी कर देना, अथवा जल निकासी की नाली को मिट्टी से पाट देना एक आम समस्या बन चुका है। इसके कारण किसानों का रास्ता बंद हो जाता है, खेतों में जलभराव हो जाता है और आए दिन खूनी संघर्ष की नौबत आ जाती है। उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 26 और धारा 67 के तहत सार्वजनिक रास्तों से अवैध अतिक्रमण हटवाने, अतिक्रमणकारी पर भारी जुर्माना लगाने और पुलिस बल की मदद से तत्काल रास्ता खुलवाने की सख्त कानूनी व्यवस्था है। इस मार्गदर्शिका में हम अतिक्रमण हटाने की विधिक प्रक्रिया और प्रार्थना पत्र तैयार करने का तरीका समझेंगे।

उपजिलाधिकारी (SDM) / तहसीलदार को चकरोड अतिक्रमण हटाने का आवेदन तुरंत तैयार करें

किसी बिचौलिए को पैसे देने या तहसील में भटकने की आवश्यकता नहीं है। गाँव, गाटा संख्या, चकरोड का विवरण व अतिक्रमणकारी का नाम दर्ज कर 1 मिनट में विधिक प्रार्थना पत्र तैयार करें:

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1. चकरोड एवं सार्वजनिक भूमि के प्रमुख कानूनी प्रावधान

उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता में सार्वजनिक संपत्तियों के संरक्षण हेतु दो अत्यंत प्रभावी धाराएं हैं:

2. तुलनात्मक तालिका: धारा 26 बनाम धारा 67 की प्रक्रिया

तुलनात्मक बिंदु धारा 26 (मार्ग रुकावट निवारण) धारा 67 (अवैध कब्जा बेदखली वाद)
उद्देश्य चकरोड या नाली का अवरोध तत्काल हटाना। अनाधिकृत कब्जा हटाना व जुर्माना वसूलना।
प्रारंभिक नोटिस एसडीएम द्वारा त्वरित आदेश। आर.सी. प्रपत्र 19 (RC Form 19) नोटिस।
अंतिम बेदखली राजस्व व पुलिस टीम द्वारा तत्काल रास्ता बहाली। आर.सी. प्रपत्र 20 (RC-20) बेदखली आदेश।
जुर्माना / क्षतिपूर्ति मार्ग अवरोध हटाने का वास्तविक खर्च। सर्किल रेट के आधार पर क्षतिपूर्ति व बेदखली व्यय।

3. आर.सी. प्रपत्र 19 और प्रपत्र 20 की कानूनी प्रक्रिया

विधिक प्रक्रिया: जब नागरिक शिकायत दर्ज कराता है, तो क्षेत्रीय लेखपाल मौके पर जाकर पैमाइश करता है। यदि सरकारी चकरोड पर कब्जा पाया जाता है, तो लेखपाल अपनी विस्तृत रिपोर्ट तहसीलदार न्यायालय को भेजता है। तहसीलदार न्यायालय अतिक्रमणकारी को आर.सी. प्रपत्र 19 जारी कर 15 दिन में जवाब मांगता है। यदि संतोषजनक उत्तर नहीं मिलता, तो न्यायालय आर.सी. प्रपत्र 20 के तहत बेदखली का आदेश पारित करता है, जिसके बाद राजस्व व पुलिस की संयुक्त टीम ट्रैक्टर/बुलडोजर की सहायता से कब्जा हटाकर चकरोड को मूल चौड़ाई में बहाल करती है।

4. आवेदन पत्र के साथ संलग्न किए जाने वाले साक्ष्य

अपने प्रार्थना पत्र को मजबूत बनाने हेतु निम्नलिखित कागजात संलग्न करें:

  1. गाँव के सजरा (नक्शा) की छायाप्रति: राजस्व नक्शे में चकरोड (दो समानांतर रेखाओं द्वारा प्रदर्शित) और उसके दोनों ओर के गाटा नंबरों को लाल स्याही से चिह्नित करें।
  2. खतौनी की प्रति: चकरोड एवं प्रभावित काश्तकारों के गाटा नंबरों की प्रमाणित खतौनी।
  3. मौके की स्पष्ट तस्वीरें: चकरोड जोतने, तारबंदी करने अथवा जल निकासी अवरुद्ध होने की स्पष्ट फोटोग्राफ।
  4. प्रभावित ग्रामीणों के संयुक्त हस्ताक्षर: रास्ते से गुजरने वाले सभी पीड़ित किसानों व ग्रामीणों के नाम व हस्ताक्षर।

5. चकरोड खाली कराने की 4-चरणीय व्यावहारिक रणनीति

  1. चरण 1 (विधिक प्रार्थना पत्र तैयार करना): हमारे पोर्टल से उपजिलाधिकारी (SDM) महोदय को संबोधित औपचारिक आवेदन तैयार करें।
  2. चरण 2 (तहसील दिवस / समाधान दिवस में प्रस्तुति): माह के पहले या तीसरे मंगलवार को आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में उपजिलाधिकारी अथवा जिलाधिकारी को व्यक्तिगत रूप से प्रार्थना पत्र सौंपकर डायरी नंबर सहित 'रिसीविंग' लें।
  3. चरण 3 (IGRS जनसुनवाई पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण): उत्तर प्रदेश सरकार के जनसुनवाई पोर्टल (jansunwai.up.nic.in) पर शिकायत दर्ज कर संदर्भ संख्या नोट करें, जिससे मामले की उच्चाधिकारियों द्वारा ऑनलाइन मॉनिटरिंग होती रहे।
  4. चरण 4 (स्थलीय पैमाइश व बेदखली): राजस्व निरीक्षक (कानूनगो) और लेखपाल पुलिस बल के साथ मौके पर आएंगे। पुराने नक्शे और सिद्दों (सर्वे पिलर) से पैमाइश कर चकरोड की सीमाएं निर्धारित की जाएंगी और अतिक्रमण हटवा दिया जाएगा।
चकरोड अतिक्रमण हटाने का आवेदन तुरंत तैयार करें:

हमारा जनरेटर टूल धारा 26 व धारा 67 के सभी विधिक प्रारूपों के अनुकूल प्रमाणित प्रार्थना पत्र तैयार करता है:

तहसीलदार / SDM जनरेटर खोलें →

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Frequently Asked Questions)

प्र. 1: चकरोड पर अवैध कब्जे के खिलाफ किस धारा में शिकायत होती है?

उत्तर: उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 26 (रास्ते की रुकावट हटाने हेतु) और धारा 67 (सार्वजनिक संपत्ति से बेदखली व हर्जाना) के अंतर्गत उपजिलाधिकारी अथवा तहसीलदार को शिकायत दी जाती है।

प्र. 2: चकरोड खाली कराने के लिए प्रार्थना पत्र किसे संबोधित करें?

उत्तर: प्रार्थना पत्र संबंधित तहसील के उपजिलाधिकारी (SDM) अथवा तहसीलदार को संबोधित किया जाता है। संपूर्ण समाधान दिवस में इसे सीधे जिलाधिकारी को भी दिया जा सकता है।

प्र. 3: आर.सी. प्रपत्र 19 और 20 का क्या अर्थ है?

उत्तर: 'आर.सी. प्रपत्र 19' अतिक्रमणकारी को कब्जा हटाने हेतु दिया जाने वाला विधिक कारण बताओ नोटिस है, जबकि 'आर.सी. प्रपत्र 20' कब्जा न हटाने पर पुलिस बल द्वारा भौतिक बेदखली का अंतिम अदालती आदेश है।

प्र. 4: क्या अतिक्रमणकारी से कोई आर्थिक हर्जाना भी वसूला जाता है?

उत्तर: हाँ, बिल्कुल। धारा 67(1) के अनुसार तहसीलदार न्यायालय अवैध कब्जाधारी से सार्वजनिक भूमि के नुकसान के एवज में सर्किल रेट के आधार पर क्षतिपूर्ति राशि और सरकारी खर्च वसूलता है।

प्र. 5: यदि लेखपाल विपक्षी से मिलकर झूठी रिपोर्ट लगा दे तो क्या करें?

उत्तर: नक्शे (सजरा) और खतौनी की प्रति लगाकर उपजिलाधिकारी (SDM) को प्रार्थना पत्र दें और राजस्व निरीक्षक (कानूनगो) व नायब तहसीलदार की स्वतंत्र संयुक्त टीम से पुनः स्थलीय जांच कराने का अनुरोध करें।

प्र. 6: क्या ऑनलाइन भी चकरोड अतिक्रमण की शिकायत दर्ज हो सकती है?

उत्तर: हाँ, उत्तर प्रदेश सरकार के जनसुनवाई (IGRS) पोर्टल (jansunwai.up.nic.in) पर जाकर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई जा सकती है, जिससे उच्चाधिकारी सीधे निगरानी करते हैं।

प्र. 7: यदि अतिक्रमण हटाने के दौरान झगड़ा या विवाद की आशंका हो तो क्या करें?

उत्तर: आवेदन में ही राजस्व टीम के साथ पर्याप्त महिला व पुरुष पुलिस बल तैनात करने का अनुरोध करें। एसडीएम कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने हेतु पुलिस बल को मौके पर भेजने का लिखित आदेश देते हैं।

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विशाल राज (Vishal Raj)
संस्थापक, Application Helper

विशाल राज नागरिक अधिकारों, भू-राजस्व कानूनों और ग्रामीण प्रशासनिक प्रक्रियाओं के विश्लेषक हैं। उनका उद्देश्य किसानों और ग्रामीणों को विधिक अधिकारों की सटीक जानकारी देकर सार्वजनिक संपत्तियों के संरक्षण और कानूनी लड़ाई में आत्मनिर्भर बनाना है।