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स्कूल या कॉलेज में बीमारी अथवा जरूरी कार्य हेतु अवकाश प्रार्थना पत्र (Leave Application) कैसे लिखें? जानिए नियम, प्रारूप व आवेदन पत्र

📅 प्रकाशित: 6 अक्टूबर 2026 • 🔄 अंतिम अपडेट: 6 अक्टूबर 2026 • ⏱️ पढ़ने का समय: 6 मिनट

स्कूली जीवन में अचानक तेज बुखार, संक्रामक बीमारी, पारिवारिक विवाह समारोह अथवा किसी आकस्मिक आवश्यक कार्य के कारण विद्यार्थियों को विद्यालय से अनुपस्थित रहना पड़ता है। बिना पूर्व लिखित सूचना अथवा प्रार्थना पत्र के विद्यालय से अनुपस्थित रहना अनुशासनहीनता माना जाता है।

सीबीएसई, आईसीएसई और राज्य शिक्षा परिषदों (यूपी बोर्ड) के स्पष्ट नियमों के अनुसार वार्षिक परीक्षाओं और बोर्ड परीक्षाओं में सम्मिलित होने के लिए न्यूनतम 75% उपस्थिति अनिवार्य होती है। यदि छात्र बीमारी या आवश्यक कार्य के दौरान समय पर औपचारिक अवकाश प्रार्थना पत्र (Leave Application) जमा कर देता है, तो उसकी अनुपस्थिति को अधिकृत अवकाश (Authorized Leave) के रूप में दर्ज किया जाता है और बोर्ड नियमों के अनुसार उपस्थिति में विधिक छूट प्राप्त होती है। इस मार्गदर्शिका में हम अवकाश पत्र लिखने के सही नियम, मेडिकल सर्टिफिकेट की अनिवार्यता और 1 मिनट में प्रार्थना पत्र तैयार करने का तरीका समझेंगे।

प्रधानाचार्य / कक्षाध्यापक महोदय को अवकाश प्रार्थना पत्र तुरंत तैयार करें

हाथ से पत्र लिखने या गलत प्रारूप बनाने की आवश्यकता नहीं है। छात्र का नाम, कक्षा, रोल नंबर, अवकाश की तारीखें व कारण दर्ज कर 1 मिनट में औपचारिक प्रार्थना पत्र तैयार करें:

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1. अवकाश (Leave) के प्रमुख प्रकार व परिस्थितियां

विद्यार्थी आमतौर पर निम्नलिखित कारणों से अवकाश हेतु आवेदन करते हैं:

2. तुलनात्मक तालिका: आकस्मिक अवकाश बनाम मेडिकल अवकाश

तुलनात्मक बिंदु जरूरी कार्य / आकस्मिक अवकाश (Casual Leave) बीमारी / मेडिकल अवकाश (Medical Leave)
अवधि सामान्यतः 1 से 3 कार्यदिवस। 3 दिन से लेकर 15 दिन या अधिक।
अतिरिक्त दस्तावेज अभिभावक के हस्ताक्षर पर्याप्त। पंजीकृत डॉक्टर का मेडिकल व फिटनेस प्रमाण पत्र।
आवेदन का समय संभव हो तो 1-2 दिन पूर्व अग्रिम आवेदन। बीमार होने के दिन सूचना व लौटने पर आवेदन।
उपस्थिति में छूट (Condonation) सामान्य अनुपस्थिति के रूप में दर्ज। 75% बोर्ड उपस्थिति में 15% तक विधिक छूट योग्य।

3. 75% उपस्थिति नियम एवं बोर्ड के मेडिकल उपबंध

बोर्ड विनियम: माध्यमिक शिक्षा बोर्डों (CBSE Examination Bye-Laws / UP Board Rules) के अनुसार किसी भी छात्र को वार्षिक परीक्षा में बैठने के लिए कम से कम 75% उपस्थिति अनिवार्य है। यदि कोई छात्र गंभीर बीमारी के कारण लंबी अवधि तक अनुपस्थित रहता है और उसने समय पर मेडिकल फिटनेस प्रमाण पत्र के साथ अवकाश पत्र दिया है, तो विद्यालय के प्रधानाचार्य की संस्तुति पर बोर्ड द्वारा 15% तक उपस्थिति में विशेष छूट (Condonation of Shortage) दी जाती है, जिससे 60% उपस्थिति पर भी छात्र को परीक्षा में बैठने की विधिक अनुमति मिल जाती है।

4. प्रार्थना पत्र में सम्मिलित किए जाने वाले अनिवार्य बिंदु

एक मानक और औपचारिक अवकाश पत्र में निम्नलिखित विवरण स्पष्ट होने चाहिए:

  1. संबोधन: 'सेवा में, श्रीमान प्रधानाचार्य महोदय / कक्षाध्यापक महोदय', विद्यालय का पूरा नाम व पता।
  2. विषय पंक्ति: स्पष्ट और संक्षिप्त विषय (उदा. 'बीमारी के कारण 3 दिन के अवकाश हेतु प्रार्थना पत्र')।
  3. छात्र का पूर्ण विवरण: छात्र का नाम, वर्तमान कक्षा, सेक्शन, और क्लास रोल नंबर / स्कॉलर नंबर (SR No.)।
  4. अवकाश की निश्चित तिथियां: किस तारीख से किस तारीख तक (कुल दिनों की संख्या सहित)।
  5. अभिभावक के हस्ताक्षर व फोन नंबर: पिता/माता के हस्ताक्षर और संपर्क नंबर ताकि स्कूल प्रशासन पुष्टि कर सके।
  6. चिकित्सक पर्चा (यदि लागू हो): 3 दिन से अधिक बीमारी होने पर डॉक्टर का मेडिकल पर्चा साथ स्टेपल करें।

5. अवकाश स्वीकृत कराने की 4-चरणीय व्यावहारिक प्रक्रिया

  1. चरण 1 (प्रार्थना पत्र तैयार करना): हमारे ऑनलाइन पोर्टल से विधिक प्रारूप में औपचारिक प्रार्थना पत्र जनरेट कर उसका प्रिंट निकालें।
  2. चरण 2 (अभिभावक के हस्ताक्षर): प्रार्थना पत्र पर अपने माता-पिता या अभिभावक के हस्ताक्षर करवाएं।
  3. चरण 3 (समय पर विद्यालय में जमा करना): यदि संभव हो तो अवकाश के पहले ही दिन किसी सहपाठी अथवा अभिभावक द्वारा विद्यालय में प्रार्थना पत्र भिजवा दें।
  4. चरण 4 (कक्षाध्यापक से स्वीकृति): विद्यालय लौटने के प्रथम दिन कक्षाध्यापक को मूल प्रार्थना पत्र (मय मेडिकल पर्चा) सौंपकर उपस्थिति पंजिका में 'Leave' अंकित करवाएं।
स्कूल अवकाश प्रार्थना पत्र तुरंत तैयार करें:

हमारा जनरेटर टूल सीबीएसई, आईसीएसई व यूपी बोर्ड के सभी औपचारिक शैक्षणिक मानकों के अनुकूल प्रार्थना पत्र तैयार करता है:

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Frequently Asked Questions)

प्र. 1: स्कूल में बीमारी की छुट्टी के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट कब जरूरी होता है?

उत्तर: जब छात्र लगातार 3 या उससे अधिक दिनों तक अस्वस्थ रहता है, तो विद्यालय में पुनः उपस्थित होने पर डॉक्टर का मेडिकल पर्चा व फिटनेस सर्टिफिकेट लगाना अनिवार्य होता है।

प्र. 2: बोर्ड परीक्षाओं में बैठने हेतु न्यूनतम कितने प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य है?

उत्तर: सामान्यतः 75% उपस्थिति अनिवार्य होती है। मेडिकल ग्राउंड पर वैध प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करने पर बोर्ड नियमानुसार 15% तक की छूट दी जा सकती है।

प्र. 3: बिना सूचना दिए अनुपस्थित रहने पर क्या नुकसान हो सकता है?

उत्तर: लगातार बिना सूचना अनुपस्थित रहने पर स्कूल पंजिका से नाम काटा जा सकता है (Struck Off), जुर्माना लग सकता है और परीक्षा प्रवेश पत्र (Admit Card) रुक सकता है।

प्र. 4: क्या छात्र स्वयं अपने हस्ताक्षर से प्रार्थना पत्र दे सकता है?

उत्तर: कक्षा 1 से 12 तक के विद्यार्थियों के आवेदन पर माता-पिता या अभिभावक के हस्ताक्षर अनिवार्य होते हैं। केवल डिग्री कॉलेज या विश्वविद्यालय स्तर पर छात्र स्वयं हस्ताक्षर कर सकते हैं।

प्र. 5: क्या शादी में जाने के लिए पहले से छुट्टी मांगनी चाहिए?

उत्तर: हाँ, बिल्कुल। पारिवारिक विवाह या जरूरी यात्रा के लिए कम से कम 2 से 3 दिन पहले स्कूल में अग्रिम प्रार्थना पत्र देकर प्रधानाचार्य से पूर्व स्वीकृति लेनी चाहिए।

प्र. 6: क्या परीक्षा के दिनों में अवकाश मिल सकता है?

उत्तर: परीक्षा के दिनों में केवल अत्यधिक गंभीर बीमारी या आकस्मिक दुर्घटना पर ही मेडिकल प्रमाण पत्र के आधार पर अवकाश स्वीकृत होता है और बाद में री-टेस्ट का अवसर मिल सकता है।

प्र. 7: क्या ईमेल या फोन से दी गई सूचना मान्य होती है?

उत्तर: आपात स्थिति में तात्कालिक सूचना हेतु ईमेल या व्हाट्सएप मान्य है, किंतु स्कूल में वापस लौटने के दिन भौतिक रूप से हस्ताक्षरित हार्डकॉपी आवेदन जमा करना अनिवार्य होता है।

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विशाल राज (Vishal Raj)
संस्थापक, Application Helper

विशाल राज शैक्षणिक विनियमों, छात्र अधिकारों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के विश्लेषक हैं। उनका उद्देश्य छात्रों और अभिभावकों को सही विधिक और औपचारिक प्रारूपों की जानकारी देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।